दुलारी विशिष्ट कहे जाने वाले सामाजिक सांस्कृतिक दायरे से बाहर है फिर भी अति विशिष्ट है। इस कथन को ध्यान में रखते हुए दुलारी की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए।
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4. दुलारी विशिष्ट कहे जाने वाले सामाजिक सांस्कृतिक दायरे से बाहर है फिर भी अति विशिष्ट है। इस कथन को ध्यान में रखते हुए दुलारी की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:- दुलारी विशिष्ट कहे जाने वाले सामाजिक, सांस्कृतिक के दायरे से बाहर है क्योंकि वह गौनहारिन है और गौनहारिन को सामाजिक प्रतिष्ठा का पात्र नहीं माना जाता है उसकी विशिष्ट प्रतिभाएँ इस प्रकार है
१) प्रबुद्ध गायिका दुलारी एक प्रभावशाली गायिका है उसकी आवाज़ में मधुरता व लय का सुन्दर संयोजन है। पद्य में सवाल-जवाब करने में उसे कुशलता प्राप्त थी। उसके आगे कोई अच्छा गायक टिक नहीं पाता था।
२) सबला नारी : वह नारी होते हुए पुरुषों के पौरुष को ललकारने की क्षमता रखती है। वह पुरुषों की तरह ही दनादन दंड लगाती और कसरत करती है।
३) देशभक्त बेशक दुलारी प्रत्यक्ष रूप से स्वतन्त्रता संग्राम में ना कूदी हो पर वह अपने देश के प्रति समर्पित स्त्री थी। तभी उसने फेंकू द्वारा दी, रेशमी साड़ियों के वंडल को, विदेशी वस्त्रों की होली जलाने हेतु जुलूस में आए लोगों को दे दिया।
४) समर्पित प्रेमिका दुलारी एक समर्पित प्रेमिका थी। वह टुन्नू से मन ही मन प्रेम करती थ परन्तु उसके जीते जी उसने अपने प्रेम को कभी व्यक्त नहीं किया। उसकी मृत्यु ने उसके हृदय में दवे प्रेम को आँसूओं के रूप में प्रवाहित कर दिया।
५) सहृदया नारी: वह सहृदया भी है। टुन्नू की मृत्यु पर उसकी आँखों से आँसुओं की मेघमाला उमड़ पड़ती है। इस तरह वह भावुकसहृदया नारी है।
६) निडर स्त्री दुलारी एक निडर स्त्री थी। वह किसी से नहीं डरती थी। अकेली स्त्री होने के कारण उसने स्वयं की रक्षा हेतु अपने को निडर वनाया हुआ था। इसी निडरता से उसने फेकूं की दी हुई साड़ी जुलूस में फेंक दी। टुन्नू की मृत्यु के पश्चात उसने खादी पहन कर समारोह में भाग लिया तथा गायन पेश किया।
७) स्वाभिमानी स्त्री दुलारी एक स्वाभिमानी स्त्री थी। वह अपने सम्मान के लिए समझौता करने के लिए कतई तैयार नहीं थी। इसलिए उसने फेकूँ सरदार द्वारा दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
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