दूसरे कवित्त के आधार पर स्पष्ट करें कि ऋतुराज वसंत के बाल रूप का वर्णन परंपरागत वसंत वर्णन से किस प्रकार भिन्न है

 4. दूसरे कवित्त के आधार पर स्पष्ट करें कि ऋतुराज वसंत के बाल रूप का वर्णन परंपरागत वसंत वर्णन से किस प्रकार भिन्न है।


उत्तर:- (i) दूसरे कवियों द्वारा ऋतुराज वसंत को कामदेव मानने की परंपरा रही है परन्तु देवदत्त जी ने ऋतुराज वसंत को कामदेव का पुत्र मानकर एक वालक राजकुमार के रूप में चित्रित किया है।

(ii) दूसरे कवियों ने जहाँ वसन्त के मादक रुप को सराहा है और समस्त प्रकृति को कामदेव की मादकता से प्रभावित दिखाया है। इसके विपरीत देवदत्त जी ने इसे एक बालक के रूप में चित्रित कर परंपरागत रीति से भिन्न प्रकृति को उसके लिए आसक्त दिखाया है।


(iii) वसंत के परंपरागत वर्णन में फूलों का खिलना, ठंडी हवाओं का चलना, नायक-नायिका का मिलना, झूले झुलना आदि होता था। परन्तु इसके विपरीत देवदत्त जी ने यहाँ प्रकृति का चित्रण, ममतामयी माँ के रुप में किया है। कवि देव ने समस्त प्राकृतिक उपादानों को वालक वसंत के लालन-पालन में सहायक बताया है।


इस आधार पर कहा जा सकता है कि ऋतुराज वसंत के बाल रूप का वर्णन परंपरागत वसंत वर्णन से सर्वथा भिन्न है।