कवि ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को किन किन विवों के माध्यम से व्यक्त किया है ?

 3. कवि ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को किन किन विवों के माध्यम से व्यक्त किया है ?

उत्तर: कवि नागर्जुन ने बच्चे की मुसकान के सौन्दर्य को जिन विवों के माध्यम से व्यक्त किया है, वे निम्नलिखित हैं:

(i) बच्चे की मुसकान से मृतक में भी जान आ जाती है। मृतक में भी डाल देगा जान।"

(ii) कवि ने बालक के मुसकान की तुलना कमल के पुष्पों से की है। जो तालाब में न खिलकर कवि की झोपड़ी में खिल रहे हैं। "छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात।"


(iii) बच्चे की मुसकान से प्रभावित होकर पाषाण (पत्थर) भी पिघलकर जल बन जाएगा। पिघलकर जल वन गया होगा कठिन पापाण।"


(iv) कवि बच्चे की मुसकान की तुलना शेफालिका के फूल से करता है। झरने लग पड़े शेफालिका के फूल।"


(v) वच्चा जब तिरछी नज़रों से देख कर मुस्कराता है कवि को लगता है कि वह उनके प्रति स्नेह प्रकट कर रहा है। "देखते तुम इधर कनखी मार और होती जब कि आँखें चार तव तुम्हारी दतुरित मुसकान ।