गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान ढोल क्यों बजाता रहा?

 

प्रश्न उत्तर

4. गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान ढोल क्यों बजाता रहा?

उत्तर:- गाँव में महामारी और सूखे के कारण निराशाजनक माहौल तथा मृत्यु का सन्नाटा छाया हुआ था। इसी प्रकार का सन्नाटा पहलवान के मन में अपने वेटों की मृत्यु के कारण छाया था। ऐसे दुःख के समय में पहलवान की ढोलक निराश गाँव वालों के मन में जीने की उमंग जागती थी। ढोलक जैसे उन्हें महामारी से लड़ने की और कभी न हारने की प्रेरणा देती थी। इसलिए शायद गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों का देहांत होने के बावजूद लुट्टन पहलवान महामारी को चुनौती देने, अपने बेटों की असामयिक मृत्यु का दुःख कम करने और गाँव वालों को महामारी से लड़ने की प्रेरणा देने के लिए ढोल बजाता रहा।