कक्षा 12 - हिंदी पहलवान की ढोलक

 

पाठ का सार:

पहलवान की ढोलक, कहानी फणीश्वर नाथ रेणु जी द्वारा लिखी गयी प्रसिद्ध कहानी है इस कहानी में लेखक ने अपने गाँव अंचल एवं संस्कृति को सजीव कर दिया है ऐसा लगता है कि मानों हटेक पात्र वास्तविक जीवन जी रहा है कहानी का प्रारंभ पहलवान की ढोलक के वजने से होता है गाँव में महामारी फैली हुई है रात में वातावरण में शान्ति है कभी कभी झोपड़ी से कराहने व के करने की आवाज तथा कभी कभी बच्चों के टोने की आवाज आती थी ऐसे समय पहलवान की ढोलक संध्या से प्रातः काल तक एक ही गति से वजती रहती थी यही आवाज मृत गाँव में संजीवनी शक्ति रहती थी।

पहलवान के जीवन के वारे में फणीश्वर नाथ रेणु जी ने बताया है कि जो वर्ष कि आयु में ही पहलवान के माता पिता की मृत्यु हो गयी और उसका पालन पोषण उसकी विधवा सास द्वारा किया गया सास पर हुए अत्याचाटों को देखकर लुट्टन को बदला लेने के लिए अपने शरीर को मज़बूत बनाना शुरू कर दिया वह गाँव में पहलवानी करने लगा एक वाट वह श्यामनगर में दंगल देखने गया था वहाँ उसने ढोलक की आवाज को अपना गुरु मानकर शेट के बच्चे चाँद सिंह नाम के पहलवान को हराया उसके बाद राजा ने उसे राज पहलवान घोषित कर दिया अब उसका पालन-पोषण राजदरवार से होने लगा फिर उसने काले खां जेसे प्रसिद्ध पहलवान को हटा कर अपने को अजेय पहलवान घोषित कर दिया

इस प्रकार पंद्रह वर्ष बीत गए लुट्टन अजेय वना रहा अपने वेटों को पहलवानी की शिक्षा देने लगा वह अपने वेटों को ढोलक के प्रताप से अजेय वनने की शिक्षा देता रहा लेकिन राजा की मृत्यु के वाद राजकुमार विलायत से आने के बाद पहलवान के खचों को देखकर उसे दरवार से हटा दिया गया विवश होकर वह अपने गाँव लोट गया गाँव आकर वह और उसे वेटे ग्रामीण बच्चों को कुश्ती सिखाने लगा लेकिन ग्रामीणों में अरुचि के कारण पहलवान के वेटे मजदूरी करने लगे। लेकिन अकस्मात् सूखा ओर महामारी के कारण एक-एक करके लोग मरने लगे। इस प्रकार उनके दोनों वेटे महामारी की चपेट में आ गए वह उन्हें उठाकर नदी में वहा आया। पुत्रों की मृत्यु के बाद भी वह ढोलक बजाता रहा तो लोगों में हिम्मत बढ़ी लेकिन चार पाँच दिन वाद ढोलक वजनी बंद हो गयी। सुवह लोगों ने देखा कि पहलवान की लाश चित्त पड़ी है, एक शिष्य ने कहा कि गुरु ने कहा था उसकी मोत के बाद उसके शरीर को चिता पर पेट के वल लिटाया जाए क्योंकि वह कभी चित्त नहीं हुआ और चिता सुलगाने के समय ढोल वजाते रहना इस प्रकार पहलवान के अंत के साथ कहानी का अंत हो जाता है