महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर होता था?

 

प्रश्न उत्तर

6. महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर होता था?

उत्तर:- महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में बड़ा अंतर होता था। सूर्योदय के समय कोलाहल, हाहाकार तथा हृदय विदारक रुदन के वावजूद भी लोगों के चेहरे पर जीवन की चमक होती थी, लोग एक-दूसरे को सांत्वना बँधाते रहते थे और एकदूसरे के दुख में शामिल होते थे परन्तु सूर्यास्त होते ही सारा परिदृश्य बदल जाता था। लोग अपने घरों में दुबक कर बैठ जाते थे। तब वे चूँ भी नहीं करते थे। यहाँ तक कि माताएँ अपने दम तोड़ते पुत्र को वेटा भी कहकर अन्तिम विदाई नहीं दे पाती थी। ऐसे समय में केवल पहलवान की ढोलक की आवाज सुनाई देती थी जैसे वह महामारी को चुनौती दे रही हो।