1 लेखिका को पहली वाट अहसास हुआ कि जीवन का आनंद यही चलायमानः सौंदर्य है, कैसे?

 प्रश्न 1 लेखिका को पहली वाट अहसास हुआ कि जीवन का आनंद यही चलायमानः सौंदर्य है, कैसे?


उत्तर- लेखिका ने धीरे-धीरे धुंध की चादर छूटने पर देखा कि सव और जन्नत विखरी पड़ी है। नजरों के छोट तक खूबसूरती ही खूबसूरती विखरी पड़ी है, जिसे देख लेखिका को आश्चर्य हो रहा था कि पलभर में ब्रहमांड में कितना कुछ घटित हो रहा है। सत प्रवाहमान झटले, लीचे वेग से वहती तिस्ता नदी सामने उठती धुंध ऊपर मंडराते आवारा वादल महिम-महिम हवा में हिलोरे लेते प्रियुता ओर रुडोडेड़ों के फूल सर्व अपनी-अपनी लय, तान और प्रवाह में वहते हुए दिखाई दिए। तब उसे अहसास हुआ कि जीवन का आनंद यही चलायमान सौंदर्य है।