मृगतृष्णा' किसे कहते हैं, कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?

 5. 'मृगतृष्णा' किसे कहते हैं, कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?

उत्तर:- गर्मी की चिलचिलाती धूप में रेत के मैदान पर दूर पानी की चमक दिखाई देती है और जब हम वहाँ जाकर देखते हैं तो कुछ नहीं मिलता, प्रकृति के इसी भ्रामक रूप को मृगतृष्णा कहा जाता है। इसका प्रयोग कविता में प्रभुता की खोज में भटकते हुए लोगों के संदर्भ में हुआ है। इसी तृष्णा में फँसकर मनुष्य हिरन की भाँति भ्रम में उसके पीछे दौड़ता रहता है लेकिन उसे कुछ भी हासिल नहीं होता।