- Get link
- X
- Other Apps
3. यदि में प्रधानमंत्री होता ! [A.I. CBSE 1999/
विचार-बिंदु • मेरी कल्पना • मेरी विदेश नीति देशद्रोह की समाप्ति भ्रष्टाचार पर रोक • औद्योगिक विकास पर बल मेरी कल्पना-अगर में प्रधानमंत्री होता ! यदि यह कल्पना सच होती तो में देश का नक्शा बदल कर रख देता में भारत सांप्रदायिकता पर रोक
को मजबूत राष्ट्र बनाने के लिए जी-जान लगा देता। मैं अपनी सेनाओं को इतना मजबूत बनाता कि कोई भी देश हमारी सीमाओं में घुसपैठ करने का विचार ही न करता पाकिस्तान की दुष्टता को इतना अधिक सहन न करता न ही अंतर्राष्ट्रीय मत की इतन अधिक परवाह करता मेरी विदेशी नीति-मैं पड़ोसी देशों के साथ मित्रतापूर्ण संबंध रखता। अगर पड़ोसी देश हमारी दोस्ती का जवाब दुश्मनी में
देता तो अवश्य ही उसकी ईंट से ईंट बजा देता। मेरा सिद्धांत यही होता "हृदय में हो प्रेम लेकिन शक्ति भी कर में प्रबल हो।"
देशद्रोह की समाप्ति- आज देश के अंदर देशद्रोहियों, भ्रष्टाचारियों, सांप्रदायिक शक्तियों और शोषकों का बोलबाला है। भारत के चप्पे-चप्पे में विदेशी शत्रुओं के एजेंट छाए हुए हैं। मैं प्रधानमंत्री होता, तो ऐसे देशद्रोहियों को कुचलकर रख देता। भ्रष्टाचार पर रोक- वर्तमान भारत में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। पिछले वर्षों में कितने बड़े-बड़े घोटाले हुए, किंतु कि का भी बाल बाँका नहीं हुआ। इससे भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों का उत्साह दुगुना हो गया है। अगर मैं प्रधानमंत्री होता तो व
विरुद्ध सख्त कदम उठाता। भ्रष्ट अधिकारियों को चुन-चुनकर दंड देता। ईमानदारी का व्यवहार करने वाले अधिकारियों को पुरस्कार देता। सांप्रदायिकता पर रोक-भारत सांप्रदायिक झगड़ों में काफी धन बल नष्ट करता है। मेरा प्रयास होता कि सांप्रदायि भावनाएँ न भड़कें। मैं हर प्रकार से अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों की दूरी को कम करता। अल्पसंख्यकों को वोट बैंक बनाने
बजाय राष्ट्रीय जीवन का अंग बनाने का प्रयास करता । औद्योगिक विकास पर बल-प्रधानमंत्री बनने पर मैं जनसंख्या वृद्धि और बेरोजगारी के विरुद्ध अभियान छेड़ देता। शिश् तकनीक और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में क्रांति ला देता। शिक्षा को रोजगार से जोड़ता। ऐसी व्यवस्था करता, जिससे हर ना को व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलता और हर प्रशिक्षु को रोज़गार मिलता। मैं देश के प्रतिभाशाली कलाकारों, वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों और व्यवसायियों को पुरस्कारों से सम्मानित करता ।