चिट्ठियों की अनूठी दुनिया



"चिट्टियों की अनूठी दुनिया" नामक इस पाठ (लेख) में चिट्ठियों की विचित्र दुनिया से हमारा परिचय कराया गया है। इसके अलावा पत्रों का महत्त्व, सभ्यता के विकास में उनका योगदान, इस वैज्ञानिक युग में भी उनकी महत्ता, ग्रामीण जीवन में पत्रों की अतिशय महत्ता का रोचक वर्णन किया गया है। पत्रों की दुनिया बहुत ही विचित्र है। वास्तव का महत्त्व हमेशा से ही रहा है। आज संचार के अनेक नए-नए साधन हो जाने पर भी पत्रों का महत्त्व कम करके नहीं आँका जा सकता। आज मोवाइल फोन पर आया एस०एम०एस० पत्र जैसा संतोष नहीं दे सकता। पत्रों का स्वरूप लिखित होने के कारण मानव सभ्यता के विकास में इनका विशेष योगदान रहा है। पत्रों द्वारा मनुष्य को संदेश और प्रेरणा दोनों ही मिलता है।

पत्र संस्कृति के विकास के लिए इसे स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया गया। विश्व डाक संघ ने 1972 से 16 वर्ष की कम उम्र वाले बच्चों के लिए पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन शुरू किया। आज इस वैज्ञानिक युग में संचार के विभिन्न साधनों के तेज़ विकास ने पत्रों की दुनिया को प्रभावित किया है। पर ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी इनकी महत्ता है। मोबाइल फोन के आविष्कार से पारिवारिक पत्रों की संख्या में की आई, पर व्यापारिक पत्रों की संख्या बढ़ती जा रही है।

कक्षा आठवीं - हिंदी चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसका पत्रों से वास्ता न पड़ा हो। उसने पत्र का इंतज़ार न किया हो, पत्र लिखा हो या किसी से लिखवाया हो, पर किसी न किसी रूप में पत्र से अवश्य ही जुड़ा रहा है। सैनिकों के लिए पत्र विशेष महत्त्व रखते हैं। पहले संचार का इकलौता साधन पत्र ही थे, पर अब तो अन्य साधन भी विकसित हो गए हैं। पत्र धरोहर का काम भी करते हैं। अनेक लोग इनका संग्रह करना अपना शौक समझते हैं। बड़े बड़े लेखक, उद्यमी, कवि, प्रशासक या किसान की पत्र रचनाएँ स्वयं में अनुसंधान का विषय हैं। पंडित नेहरू द्वारा इंदिरा गाँधी को लिखे गए पत्र करोड़ों लोगों को प्रेरणा देते हैं। एस०एम०एस० संदेश सँजोकर नहीं रखे जा सकते, पर बड़ी हस्तियों के पत्र यादगार के रूप से सहेजकर रखे जा सकते हैं

दूसरी घटना के अनुसार, लेखक सपरिवार बस में यात्रा कर रहा था। बस में कुछ खराबी थी, जिससे वह रुक रुककर चल रही थी बस गतव्य से आठ किलोमीटर पहले ही सुनसान जगह पर खड़ी हो गई। बस के कंडक्टर ने एक साइकिल उठाई और चलता बना। सदेह एवं भय से त्रस्त लोगों ने तरह तरह की बातें शुरू कर दी। कोई दो दिन पहले यही हुई डकैती की बात कहता तो कोई कुछ और लेखक सपरिवार था बच्चे पानी पानी चिल्ला रहे थे, परंतु पानी वहाँ उपलब्ध न था। कुछ नौजवानों ने ड्राइवर को पीटने का मन बनाया। ड्राइवर कातर ढंग से लेखक की ओर देखने लगा। लेखक के समझाने पर नौजवानों ने उसे बंधक बना लिया और अलग लेकर चले गए कि यदि बस का कंडक्टर डाकुओं को लेकर आता है तो पहले इस ड्राइवर को ही खत्म कर दिया जाए। इस बीच डेढ़-दो घंटे बीत गए बच्चे भोजन पानी के लिए व्याकुल थ

दुनिया के अनेक संग्रहालयों में महान विभूतियों के पत्र देखे जा सकते हैं। पत्रों के माध्यम से तत्कालीन देशकाल और समाज को भलीभाँति जाना समझा जा सकता है। अंग्रेजों द्वारा लिखे गए पत्र बाद में बहुत महत्त्वपूर्ण बन गए। महात्मा गाँधी के पास तमाम पत्र महात्मा गाँधी-इंडिया”! लिखकर आते थे। अपने पास आए तमाम पत्रों का जवाब वे स्वयं दिया करते थे। उनके जवाबी पत्रों को लोग यादगार के रूप में या फ्रेम में सजाकर रख लेते थे। पत्रों के आधार पर अनेक किताबें लिखी गई हैं। पत्र दस्तावेज जैसा ही महत्त्व रखते हैं। निराला के पत्र "हमको लिख्यो है कहा?, पंत के दो सौ पत्र बच्चन के नाम", आदि इसके प्रमाण हैं। प्रेमचंद नवोदित लेखकों को पत्र के माध्यम से प्रेरित करते थे। नेहरू, गाँधी जी, रवींद्रनाथ टैगोर के पत्र प्रेरणा स्रोत होते थे। कठिन परिस्थितियों में इनसे पथ-प्रदर्शन मिलता है।

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पत्रों के आदान-प्रदान का सिलसिला तो हुआ। डाक विभाग की गुडविल सबसे अच्छी है। विभाग लोगों को जोड़ने का काम करता है। जन-जन तक इसकी पहुँच है। शहर के आलीशान महल में जी रहे पहाड़ी लोग हों, मछुआरे हों या राजस्थान प्रांत के वासी, पत्रों का इंतज़ार सबको बेसब्री से रहा है। डाक विभाग केवल पत्रों को ही लोगों तक नहीं पहुँचाता, वह इससे भी ज़रूरीरी चीज मनी ऑर्डर भी उन तक पहुँचाता है। दूरदराज़ के क्षेत्रों में मनी ऑर्डर पहुँचने पर ही वहाँ चूल्हा जलता है। गरीब वस्तियों में डाकिये को देवद्रुत के रूप में देखा जाता है, क्योंकि उसी के आने से उन्हें पैसा तथा खुशियाँ मिल पाती हैं।