मेरे सपनों का भारत

मेरे सपनों का भारत

-बिंदु-• भारत के बारे में मेरी कल्पना • ज्ञान का भंडार शांति का दूत • कला, संस्कृति और अध्यात्म का


मेरे देश रामराज्य की कल्पना साकार हो। एक बार फिर से ऐसे शासक आएँ कि जिनके राज्य में चोरी, बलात्कार, हत्या, डकैती भारत के बारे में मेरी कल्पना- जब भी मैं अपने देश के भविष्य की कल्पना करता हूँ, तो चाहता हूँ कि एक बार फिर से


 का नामोनिशान न हो। सब ओर सच्चाई, सादगी और खुशी का बोलबाला हो। सब लोग भाईचारे के कारण मन से सुखी हों। न केवल धन-संपन्न हो बल्कि आपसी ज्ञान का भंडार मेरा सपना है कि मेरा भारत फिर से 'जगद्गुरु की भूमिका निभाए। यहाँ के विश्वविद्यालय ज्ञान के भंडार हों। यहाँ न केवल धर्म, दर्शन और साहित्य का विकास हो बल्कि विज्ञान और तकनीक की भी उन्नति हो। जिस प्रकार पहले आर्यभट्ट, चरक, धन्वंतरि आदि वैज्ञानिकों ने गणित, ज्योतिष, चिकित्सा आदि के क्षेत्र में नई-नई खोजें कीं, उसी प्रकार फिर से हमारे


शांति का दूत-भारत के पास गर्व करने योग्य विशेषता है-शांति की नीति में चाहूंगा कि आज हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान, जो कभी हमारा भाई था, वह पुनः हमारा मित्र बने। हम आपसी झगड़े प्रेम प्यार से सुलझा कर मित्र की तरह रहें। • यहाँ मैं यह भी कहना चाहूँगा कि भारत शक्तिशाली देश बने हमारे पास आधुनिक हथियार और साधन विद्यमान हो ताकि हम किसी भी स्थिति का मुकाबला कर सकें। हम शक्ति और नैतिकता दोनों का बराबर विकास करें। कला, संस्कृति और अध्यात्म का विकास मेरा भारत कला, संस्कृति और अध्यात्म के लिए विश्व विख्यात रहा है। यहाँ कालिदास, भरतमुनि, तुलसी, सूर, तानसेन जैसे कलाकार और साहित्यकार हुए हैं। मैं चाहता हूँ कि भारत की धरती फिर से का


और संस्कृति के रस से सराबोर हो जाए। भारत का सदा से यही विश्वास रहा है कि मानव को सच्चा सुख अध्यात्म मिल सकता है। मैं चाहता हूँ कि अध्यात्म की यह विद्या भारत में फिर से फले-फूले, जिससे दुःखी संसार को शांति से जीने का सहारा मिले।