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जो मुझको वदनाम करे हैं काश वे इतना सोच सकें मेरा परदा खोले है या अपना परदा खोले है।
प्रसंग प्रस्तुत शेर हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह, भाग-2 में संकलित गज़ल से लिया गया है। इसके रचयिता फिराक गोरखपुरी हैं। इसमें शायर ने निंदकों पर प्रहार किया है।
व्याख्या- शायर कहता है कि संसार में कुछ लोग उसे वदनाम करना चाहते हैं। ऐसे निंदकों के लिए कवि कामना करता है कि वे केवल यह बात समझ सकें कि वे मेरी जो बुराइयाँ संसार के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं, उससे खुद उनकी कमियाँ उजागर हो रही हैं। वे मेरा परदा खोलने की बजाय अपना परदा खोल रहे हैं।
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