तेरे गम का पासे अदव है कुछ दुनिया का ख्याल भी हैं सबसे छिपा के दर्द के मरे चुपके चुपके रे ले हैं।

 तेरे गम का पासे अदव है कुछ दुनिया का ख्याल भी हैं सबसे छिपा के दर्द के मरे चुपके चुपके रे ले हैं।


प्रसंग- प्रस्तुत शेर हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह, भाग-2' में संकलित गज़ल से उदृधृत है। इसके रचयिता फिराक गोरखपुरी हैं। इसमें शायर ने प्रेम की पीड़ा को व्यक्त किया है।


व्याख्या कवि अपनी प्रेमिका से कहता है कि मुझे तुम्हारे गम का पूरा ख्याल है। मैं तुम्हारी पीड़ा का सम्मान करता हूँ. परंतु मुझे संसार का भी ध्यान है। यदि मैं हर जगह तुम्हारे दिए दुख को सबके सामने गाता फिरू तो दुनिया हमारे प्रेम को बदनाम करेगी। इसलिए मैं इस पीड़ा को अपने हृदय में छिपा लेता हूँ और चुपचाप अकेले में रो लेता हूँ। आशय यह है कि प्रेमी अपने दुख को संसार के सामने प्रकट नहीं करते।