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42. विज्ञान वरदान या अभिशाप
विचार-बिंदु विज्ञान एक वरदान विज्ञान एक अभिशाप निष्कर्ष
विज्ञान वरदान-आर्केडियन फरार लिखते हैं- "विज्ञान ने अंधों को आँखें दी हैं और बहरों को सुनने की शक्ति। उसने जीवन को दीर्घ बना दिया है, भय को कम कर दिया है। उसने पागलपन को वश में कर लिया है और रोग को रौंद डाला है।" यह उक्ति सत्य है। विज्ञान की सहायता से असाध्य रोगों के इलाज ढूँढ लिए गए हैं। कई बीमारियों को समूल नष्ट कर दिया।
है। "रसोई-घर से लेकर मुर्दाघर तक सब जगह विज्ञान ने वरदान ही वरदान बाँटे हैं। विज्ञान की सहायता से पूरी दुनिया एक परिवार बन गई है। जब चाहे तब मनुष्य अपने प्रियजनों से बात कर सकता है। घंटे भर में दुनिया का चक्कर लगा सकता है। हेकेंडों में दुनिया भर को कोई संदेश दिया जा सकता है।
विज्ञान ने दूरदर्शन, रेडियो, वीडियो, आडियो, चलचित्र आदि के द्वारा मनुष्य के नीरस जीवन को सरस बना दिया है। डीबीसों घंटे चलने वाले कार्यक्रम, नए-नए सुंदर सुस्वादु व्यंजन, सुखदायक रंगीन वस्त्र, सौंदर्य-वर्द्धक साधन विज्ञान की ही देन हैं। विज्ञान : एक अभिशाप-विज्ञान का सबसे बड़ा खतरा है- पर्यावरण प्रदूषण। इसके कारण आज शहरों में साँस लेना दूभर
हो गया है। हर जगह शोर, गंदगी और बीमारियों का साम्राज्य-सा फैल गया है। कृत्रिम खादों, दवाइयों के कारण भूमि से उत्पन्न
इन-फल तक दूषित हो गए हैं।
विज्ञान की सहायता से मनुष्य ने खतरनाक बम बना लिए हैं। इससे अनेक बार विषैली गैसें तथा रेडियोधर्मी किरणें विकीर्ण हो चुकी हैं। भोपाल गैस कांड और ओजोन गैस की परत का फटना इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। यातायात की तेज गति के कारण मी मौतें होने लगी हैं। लोगों के शरीर पंगु होने लगे हैं। ये सब जीवन पर अभिशाप हैं। विज्ञान ने मनुष्य को बेरोज़गार बना दिया है। सैकड़ों आदमियों का काम करने वाली मशीनों ने कारीगरों के हाथ बेकार कर दिए हैं।
निष्कर्ष-सच बात यह है कि विज्ञान के सदुपयोग या दुरुपयोग को ही वरदान या अभिशाप कहते हैं। विज्ञान का संतुलित
उपयोग जीवनदायी है। उसका अंधाधुंध दुरुपयोग विनाशकारी है।
43. दैनिक जीवन में विज्ञान
विचार-बिंदु-• जन-जीवन में क्रांति वैज्ञानिक उत्पादन में वृद्धि स्वास्थ्य और चिकित्सा में सुधार तार्किक चिंतन
का विकास।
जन-जीवन में क्रांति-विज्ञान के विकास से जन-जीवन में क्रांति आ गई है। विज्ञान ने बड़े-बड़े उद्योगों को जन्म दिया है। यातायात, संचार और श्रम के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुविधाएँ प्रदान की हैं। वैज्ञानिक साधनों के कारण आज पूरा विश्व कुटुंब की भाँति बन गया है। विश्व की कोई भी घटना मिनटों-सैकेंडों में विश्वभर में फैल जाती है। दूरदर्शन, रेडियो, दूरभाष, इंटरनेट और उपग्रह-संचार से सारा विश्व मानो जुड़ गया है।
वैज्ञानिक उत्पादन में वृद्धि-आज से कुछ वर्ष पहले बिजली का आविष्कार नहीं हुआ था। तब न स्वचालित मशीनें थीं, न में प्रकाशमान थीं। नगर और ग्राम संध्या होते ही अँधेरे से घिर जाते थे। आज हमारी रातें रोशन हैं। दिन में ही नहीं, रात में भी देशनियाँ जगमगाती हैं। कारखाने दिन-रात उत्पाद उगलते हैं। मनुष्य की क्षमता कितनी बढ़ गई है। स्वास्थ्य और चिकित्सा में सुधार- विज्ञान के कारण हमने अनेक थीमारियों पर विजय पा ली है। मृत्यु दर को काफी कम
कर दिया है। जीवन का स्तर सुधार लिया है। बाढ़, सूखा, महामारी जैसी प्राकृतिक विपदाओं पर भी काफी मात्रा में नियंत्रण पा
लिया है। पोलियो, मलेरिया, चेचक जैसी अनेक बीमारियों के विरुद्ध अभियान छेड़कर जनजीवन को सुरक्षित बनाने के प्रयास जारी
तार्किक चिंतन का विकास-विज्ञान व्यक्ति के चिंतन पर भी प्रभाव डालता है। वह तथ्यों को महत्त्व देता है। इसका लाभ ये है कि मनुष्य अपनी रूदियों के जंजाल से मुक्त होता है। उसकी कपोल-कल्पनाएँ नष्ट होती हैं। जिन भ्रामक धारणाओं के कारण उनका जीवन नष्ट होता था, उनसे उसे मुक्ति मिलती है।
विज्ञान सत्य की खोज का सबसे सशक्त साधन है। एक उदाहरण पर्याप्त है। क्रिकेट के मैच में लग-अंपायर संदिग्ध के और रन-आउट सूक्ष्म अंतर को पकड़ने में गलतियाँ कर जाता था। अतः उसकी छोटी-सी गलती किसी भी टीम या खिलाड़ी का मनोबल तोड़ देती थी। परंतु आज मशीन की सहायता से यह गलती टल जाती है। इस प्रकार विज्ञान अनेक रोगों की सही पहचान कराके हमें अनेक बीमारियों से बचा लेता है। सचमुच विज्ञान वरदान है।