दो बात कही, दो बात सुनी। कुछ हँसे और फिर कुछ रोए । छककर सुख-दुख के घूँटों को हम एक भाव से पिए चले।

 दो बात कही, दो बात सुनी। कुछ हँसे और फिर कुछ रोए । छककर सुख-दुख के घूँटों को हम एक भाव से पिए चले।


दीवानों की हस्ती भावार्थ: भगवती चरण वर्मा दीवानों की हस्ती कविता की इन पंक्तियों में कह रहे हैं कि

वो जहाँ भी जाते हैं, लोगों से ह घुलते-मिलते हैं, उनके सुख दुख वांटते हैं। कवि के लिए सुख और के दोनों

भावनाएं एक समान हैं, इसलिए, वो। परिस्थितियों को शांत रहकर सहन कर लेते हैं। इस तरह, कवि अपने

मार्ग पर चलते हुए, लोगों का दुख-सुख वाँटते हैं और उन्हें एक समान ढंग से ग्रहण करके आगे बढ़ जाते हैं।