सभी मनुष्य एक ही प्रकार से देखते सुनते हैं पर एक समान विचार नहीं रखते। सभी अपनी-अपनी मनोवृत्तियों के अनुसार कार्य करते हैं। पाठ में आई कवीर की किस साखी से उपर्युक्त पंक्तियों के भाव मिलते हैं, एक समान होने के लिए आवश्यक क्या है? लिखिए।

 7. सभी मनुष्य एक ही प्रकार से देखते सुनते हैं पर एक समान विचार नहीं रखते। सभी अपनी-अपनी मनोवृत्तियों के अनुसार कार्य करते हैं। पाठ में आई कवीर की किस साखी से उपर्युक्त पंक्तियों के भाव मिलते हैं, एक समान होने के लिए आवश्यक क्या है? लिखिए।


उत्तर:- कवीर दास की निम्नलिखित साखी हमे समानता का सन्देश देती है.

कबीर घास न नीदिये, जो पाऊं तली होई ।

उड़ि पड़े जब आँखी मैं, खरी दुहेली होई ।।

इस दोहे में कहा गया है कि मनुष्य को राह में पड़े तिनके का भी अपमान नहीं करना चाहिए, चाहे उसका

अस्तित्व तुच्छ ही है, उसी तरह समाज में हर प्रकार का भेद भाव समाप्त होना चाहिए, चाहे वह जातीय

में

आधार पर हो या आर्थिक