ऐसे में तू याद आए है अंजुमने-मय में रिंदों को रात गए गर्दू पै फ़रिश्ते वावे- गुनह जय खोले हैं

 ऐसे में तू याद आए है अंजुमने-मय में रिंदों को रात गए गर्दू पै फ़रिश्ते वावे- गुनह जय खोले हैं


प्रसंग- प्रस्तुत शेर हमारी पाठयपुस्तक आरोह, भाग-2' में संकलित गजल से उद्धृत है। इसके रचयिता फिराक गोरखपुरी हैं। इस शेर में कवि ने प्रियजन की यादों का बखान किया है।


व्याख्या कवि कहता है कि हे प्रिया तुम वियोग के समय में इस तरीके से याद आते हो जैसे शराब की महफ़िल में शरावियों को शराब की याद आती है तथा जैसे आधी रात के समय देवदूत आकाश में संसार के पापों का अध्याय खोलते हैं।