जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान । मेल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।।1|

 जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान । मेल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।।1|


कबीर की साखियाँ अर्थ सहित कबीर की साखी की इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि हमें कभी भी सज्जन इंसान की जाति पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि हमें तो उसके गुणों के आधार पर उसका सम्मान करना चाहिए। जैसे, तलवार की कीमत म्यान में पड़े रहने से नहीं होती, बल्कि तलवार की धार में छिपी होती है।