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पाठ का सार:
कहानी को नाटक में किस प्रकार रूपांतरित करें
अभिव्यक्ति और माध्यम (Core + Elective)
कहानी को नाटक में रूपांतरित करने के लिए अनेक महत्त्वपूर्ण वातों का ध्यान रखना आवश्यक है जो इस प्रकार है
1. कहानी की कथावस्तु को समय ओर स्थान के आधार पर विभाजित किया जाता है।
2. कहानी में घटित विभिन्न घटनाओं के आधार पर दृश्यों का निर्माण किया जाता है।
3. कथावस्तु से संबंधित वातावरण की व्यवस्था की जाती है।
4. ध्वनि ओर प्रकाश व्यवस्था का ध्यान रखा जाता है।
5. कथावस्तु के अनुरूप मंच सज्जा और संगीत का निर्माण किया जाता है।
6. पात्रों के द्वंद्व को अभिनय के अनुरूप परिवर्तित किया जाता है।
7. संवादों को अभिनय के अनुरूप स्वरूप प्रदान किया जाता है।
8. कथानक को अभिनय के अनुरूप स्वरूप प्रदान किया जाता है।
कहानी
नाटक
1. कहानी एक ऐसी गद्य विधा है जिसमें जीवन के
किसी अंक विशेष का मनोरंजन पूर्ण चित्रण
किया जाता है।
2. कहानी का संबंध लेखक और पाठकों से होता है।
3. कहानी कही अथवा पढ़ी जाती है।
4. कहानी को आरंभ, मध्य और अंत के आधार पर
बांटा जाता है।
1. नाटक एक ऐसी गद्य विधा है जिसका मंच पर
अभिनय किया जाता है।
2. नाटक का संबंध लेखक, निर्देशक, दर्शक तथा
श्रोताओं से है।
3. नाटक का मंच पर अभिनय किया जाता है।
4. नाटक को दृश्यों में विभाजित किया जाता है।
5. कहानी में मंच सज्जा, संगीत तथा प्रकाश का
महत्त्व नहीं है।
5. नाटक में मंच सज्जा, संगीत और प्रकाश व्यव का विशेष महत्त्व होता है।
नाट्य रूपांतरण करते समय अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है जो इस प्रकार है
1. सबसे प्रमुख समस्या कहानी के पात्रों के मनोभावों को कहानीकार द्वारा प्रस्तुत प्रसंगों अथवा
मानसिक द्वंवों के नाटकीय प्रस्तुति में आती है।
2. पात्रों के द्वंद्व को अभिनय के अनुरूप बनाने में समस्या आती है।
3. संवादों को नाटकीय रूप प्रदान करने समस्या आती है।
4. संगीत, ध्वनि ओर प्रकाश व्यवस्था करने में समस्या होती है।
5. कथानक को अभिनय के अनुरूप बनाने में समस्या होती है।
कहानी अथवा कथानक का नाट्य रूपांतरण करते समय निम्नलिखित आवश्यक बातों का ध्यान रखना चाहिए.
1. कथानक के अनुसार ही दृश्य दिखाए जाने चाहिए।
2. नाटक के दृश्य बनाने से पहले उसका खाका तैयार करना चाहिए।
3. नाटकीय संवादों का कहानी के मूल संवादों के साथ मेल होना चाहिए।
4. कहानी के संवादों को नाट्य रूपांतरण में एक निश्चित स्थान मिलना चाहिए।
5. संवाद सहज, सरल, संक्षिप्त, सटीक, प्रभावशाली ओर वोलचाल की भाषा में होने चाहिए।
6. संवाद अधिक लंबे और ऊवाऊ नहीं होने चाहिए।
कहानी अथवा कथानक का नाट्य रूपांतरण करते समय निम्नलिखित आवश्यक बातों का ध्यान रखना चाहिए
1. कथानक के अनुसार ही दृश्य दिखाए जाने चाहिए।
2. नाटक के दृश्य बनाने से पहले उसका खाका तैयार करना चाहिए।
3. नाटकीय संवादों का कहानी के मूल संवादों के साथ मेल होना चाहिए।
4. कहानी के संवादों को नाट्य रूपांतरण में एक निश्चित स्थान मिलना चाहिए।
5. संवाद सहज, सरल, संक्षिप्त, सटीक, प्रभावशाली ओर वोलचाल की भाषा में होने चाहिए।
6. संवाद अधिक लंबे और ऊवाऊ नहीं होने चाहिए।
कहानी के पात्र नाट्य रूपांतरण में निम्न प्रकार से परिवर्तित किये जा सकते हैं
1. नाट्य रूपांतरण करते समय कहानी के पात्रों की दृश्यात्मकता का नाटक के पात्रों से मेल होना चाहिए।
2. पात्रों की भावभंगिमाओं तथा उनके व्यवहार का भी उचित ध्यान रखना चाहिए।
3. पात्र घटनाओं के अनुरूप मनोभावों को प्रस्तुत करने वाले होने चाहिए।
4. पात्र अभिनय के अनुरूप होने चाहिए।
5. पात्रों का मंच के साथ मेल होना चाहिए।
1. कहानी की कथावस्तु को समय और स्थान के आधार पर विभाजित करके दृश्य बनाए जाते हैं।
2. प्रत्येक दृश्य कथानक के अनुसार बनाया जाता है।
3. एक स्थान और समय पर घट रही घटना को एक दृश्य में लिया जाता है।
4. दूसरे स्थान और समय पर घट रही घटना को अलग दृश्यों में बांटा जाता है।
5. दृश्य विभाजन करते समय कथाक्रम ओर विकास का भी ध्यान रखा जाता है।