पाठ्यपुस्तक में संकलित फिराक गोरखपुरी की गजल का केंद्रीय भाव लिखिए

 प्रश्न 4 पाठ्यपुस्तक में संकलित फिराक गोरखपुरी की गजल का केंद्रीय भाव लिखिए।

उत्तर- फिराक गोरखपुरी ने गजल में दर्द व कसक का वर्णन किया है। उसने बताया है कि लोगों ने उसे सदा ताने दिए हैं। उसकी किस्मत हमेशा उसे दगा देती रही। दुनिया में केवल गम ही था जो उसके पास रहा। उसे लगता है जैसे रात के सन्नाटे में कोई बोल रहा है। इश्क के बारे में शायर का कहना है कि इश्क वही पा सकता है जो अपना सवकुछ दाँव पर लगा दे। कवि की गजलों पर मीट की गजलों का प्रभाव है। यह गज़ल इस तरह वोलती है जिसमें दर्द भी है, एक शायर की ठसक भी है और साथ ही हे काव्यशिल्प की वह ऊँचाई, जो गजल की विशेषता मानी जाती है।