बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी- जवानी जिंदगी सव कुछ होम कर देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए विकने के मौके ढूँढ़ती है।

 3. आशय स्पष्ट कीजिए.


"बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी- जवानी जिंदगी सव कुछ होम कर देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए विकने के मौके ढूँढ़ती है।


उत्तर:- देशभक्तों ने देश को आज़ादी दिलाने के लिए अपना सर्वस्व देश को समर्पित कर दिया। आज हम स्वतंत्र देश में आज़ादी की साँस ले रहे है, यह उन्हीं देशभक्तों के कारण संभव हो पाया है, उन्हीं के कारण हम आज़ाद हुए हैं परन्तु यदि किसी के मन में ऐसे देशभक्तों के लिए सम्मान की भावना नहीं है, वे उनकी देशभक्ति पर हँसते है तो यह बड़े ही दुःख की बात है। ऐसे लोग सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं, वे केवल स्वार्थी होते हैं। लेखक ने ऐसे लोगों पर अपना गुस्सा व्यक्त किया है।