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बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी- जवानी जिंदगी सव कुछ होम कर देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए विकने के मौके ढूँढ़ती है।