जैहउँ अवध कवन मुहु लाई। नारि हेतु प्रिय भाई गँवाई ॥ बरु अपजस सहतेउँ जग माही। नारि हानि विसेष छति नाही ॥ भाई के शोक में डूबे राम के इस प्रलाप वचन में स्त्री के प्रति कैसा सामाजिक दृष्टिकोण संभावित है?

 8. जैहउँ अवध कवन मुहु लाई। नारि हेतु प्रिय भाई गँवाई ॥ बरु अपजस सहतेउँ जग माही। नारि हानि विसेष छति नाही ॥ भाई के शोक में डूबे राम के इस प्रलाप वचन में स्त्री के प्रति कैसा सामाजिक दृष्टिकोण संभावित है?


उत्तर:- भाई के शोक में डूवे राम ने कहा कि स्त्री के लिए प्यारे भाई को खोकर, मैं कौन सा मुँह लेकर अवध वापस जाऊँगा? मैं जगत में बदनामी भले ही सह सकता हूँ क्योंकि स्त्री की हानि से कोई विशेष क्षति नहीं थी। स्त्री का विकल्प हो सकता है पर भाई का नहीं। उस समय का समाज पुरुषप्रधान था। नारी को समाज में समानता का अधिकार नहीं था।