जैहउँ अवध कवन मुहु लाई। नारि हेतु प्रिय भाई गँवाई ॥ बरु अपजस सहतेउँ जग माही। नारि हानि विसेष छति नाही ॥ भाई के शोक में डूबे राम के इस प्रलाप वचन में स्त्री के प्रति कैसा सामाजिक दृष्टिकोण संभावित है? on April 30, 2022 जैहउँ अवध कवन मुहु लाई। नारि हेतु प्रिय भाई गँवाई ॥ बरु अपजस सहतेउँ +