आवत गारी एक है, उलटत होइ अनेक । कह कबीर नहिं उलटिए, वही एक की एक।।2।।

 आवत गारी एक है, उलटत होइ अनेक । कह कबीर नहिं उलटिए, वही एक की एक।।2।।


कबीर की साखियाँ अर्थ सहित प्रस्तुत साखी में कवीरदास जी कहते हैं कि किसी के अपशब्दों का जवाब कभी भी अपशब्दों से मत दो। इससे वो अपशब्द बढ़ने के बजाय घटते-घटते ख़त्म हो जाएंगे।