आए बन कर उल्लास अभी, आँसू बन कर वह चले अभी, सब कहते ही रह गए, अरे, तू कैसे आए, कहाँ चले?

आए बन कर उल्लास अभी, आँसू बन कर वह चले अभी, सब कहते ही रह गए, अरे, तू कैसे आए, कहाँ चले?


दीवानों की हस्ती भावार्थ : दीवानों की हस्ती कविता की इन पंक्तियों में कवि ने कहा है कि दीवाने-मस्तमौला लोग जहाँ भी जाते हैं, वहाँ का माहौल ख़ुशियों से भर जाता है। फिर जब वो उस जगह से जाने लगते हैं, तो सब की हो जाते हैं। लोगों को उनके जाने का पता तक नहीं चलता। वो तो मन में ही अफ़सोस करते रह जाते हैं कि उन्हें मालूम ही नहीं हुआ, कवि कब आए और कब चले गए। इस प्रकार क कह रहे हैं कि एक जगह टिककर रहना उनका स्वभाव नहीं है, उन्हें घूमते रहना पसंद है। इसीलिए वो अक्सर अलग-अलग जगह आते-जाते रहते हैं।