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धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहाँ कोऊ। काहू की वेटीसों वेटा न व्याहव, काहूकी जाति वियार न सोऊ। तुलसी सरनाम गुलामु हैं राम को, जाको रुचै सो कहै कछु ओऊ। माँगि कै खैवो, मसीत को सोइवो, लैवको एकु न दैवको दो