धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहाँ कोऊ। काहू की वेटीसों वेटा न व्याहव, काहूकी जाति वियार न सोऊ। तुलसी सरनाम गुलामु हैं राम को, जाको रुचै सो कहै कछु ओऊ। माँगि कै खैवो, मसीत को सोइवो, लैवको एकु न दैवको दो on April 29, 2022 अवधूत कहौ जोलहा कहाँ कोऊ। धूत कहौ रजपूतु कहौ +