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माला तो कर में फिरै, जीभि फिरै मुख माँहि। मनुवाँ तो दहँ दिसि फिरै, यह तो सुमिरन नाहिं।। 3 ।।

माला तो कर में फिरै, जीभि फिरै मुख माँहि। मनुवाँ तो दहँ दिसि फिरै, यह तौ सुमिरन नाहि ।। 3 ।।