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नहला के छलके छलके निर्मल जल से उलझे हुए गेसुओं में कंघी करके किस प्यार से देखता है वच्चा मुँह को जब घुटनियों में ले के है पिन्हाती कपड़े।
नहला के छलके छलके निर्मल जल से उलझे हुए गेसुओं में कंघी करके किस प्यार से देखता है वच्चा मुँह को जब घुटनियों में ले के है पिन्हाती कपड़े।
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