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मैं साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ! मैं जग जीवन का भार लिए फिरता हूँ, फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ, कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकर मैं साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ! मैं स्नेह-सुधा का पान किया करता हूँ, मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ, जग पूछ रहा उनको, जो जय की गाते, मैं अपने मन का गान किया करता हूँ!
मैं साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ! मैं जग जीवन का भार लिए फिरता हूँ, फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ, कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकर मैं साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ! मैं स्नेह-सुधा का पान किया करता हूँ, मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ, जग पूछ रहा उनको, जो जय की गाते, मैं अपने मन का गान किया करता हूँ!
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