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कभी-कभी तारसप्तक की ऊँचाई पर पहुँचकर मुख्य गायक का स्वर विखरता नज़र आता है उस समय संगतकार उसे बिखरने से बचा लेता है। इस कथन के आलोक में संगतकार की विशेष भूमि