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यह लो, करते ही रहते हैं अपने व्यंग्य मलिन उपहास तब भी कहते हो कह डालू दुर्बलता अपनी वीती। तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे यह गागर रीती।
यह लो, करते ही रहते हैं अपने व्यंग्य मलिन उपहास तब भी कहते हो कह डालू दुर्बलता अपनी वीती। तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे यह गागर रीती।
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