मम हित लागि तजेहु पितु माता सहेहु विपिन हिम आतप वाता॥ सो अनुराग कहाँ अब भाई । उठहु न सुनि मम वच विकलाई॥ जो जनतेऊँ वन बंधु विछोहु पिता वचन मनतेॐ नहि ओहू ॥ on April 30, 2022 मम हित लागि तजेहु पितु माता सहेहु विपिन हिम आतप वाता॥ सो अनुरा +