वैसेड राज-समाज वने, गज-बाजि घने, मन संभ्रम छायौ । वैसेइ कंचन के सब धाम है, द्वारिके के महिलों फिरि आयौ । भौन विलोकिवे को मन लोचत सोचत ही सब गाँव मँझायौ। पूछत पाँड़े फिरें सबसों पर झोपरी को कहूँ खोज न पायौ ॥ on May 02, 2022 गज-बाजि घने मन संभ्रम छायौ । वैसेड राज-समाज वने +