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कछु भाभी हमको दियौ, सो तुम काहे न देत चाँपि पोटरी काँख में रहे कहौ केहि हेत ॥ आगे चना गुरु मातु दिये त, लिये तुम चावि हमे नहिं दीने। श्याम कहाँ मुसुकाय सुदामा सों, चोरि कि वानि में हौ जू प्रवीने ॥ पोटरि कॉख में चॉपि रहे तुम, खोलत नाहि सुधा रस भीने । पाछिलि बानि अजौं न तजी तुम, तैसइ भाभी के तंदुल कीने ॥