रुबाइयां और ग़ज़ल,आंगन में लिए चाँद के टुकड़े को खड़ी हाथों पे झुलाती हैं उसे गोद भरी रह-रह के हवा में जो लोका देती है गूँज उठती हैं। खिलखिलाते बच्चे की हँसी । on April 30, 2022 आंगन में लिए चाँद के टुकड़े को खड़ी हाथों पे झुलाती हैं उसे गोद भरी रह-रह के +