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रुबाइयां और ग़ज़ल,आंगन में लिए चाँद के टुकड़े को खड़ी हाथों पे झुलाती हैं उसे गोद भरी रह-रह के हवा में जो लोका देती है गूँज उठती हैं। खिलखिलाते बच्चे की हँसी ।