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मै जला हृदय में अग्नि, दहा करता हूँ, सुख-दुख दोनों में मगन रहा करता हूँ, जग भव सागर तरने की नाव बनाए, मैं, भव मौजों पर मस्त वहा करता हूँ।
मै जला हृदय में अग्नि, दहा करता हूँ, सुख-दुख दोनों में मगन रहा करता हूँ, जग भव सागर तरने की नाव बनाए, मैं, भव मौजों पर मस्त वहा करता हूँ।
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