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नादान वही हैं, हाय, जहां पर दाना! फिर मूढ़ न क्या जग, जो इस पर भी सीखें? मैं सीख रहा हूं, सीखा ज्ञान भुलाना!
नादान वही हैं, हाय, जहां पर दाना! फिर मूढ़ न क्या जग, जो इस पर भी सीखें? मैं सीख रहा हूं, सीखा ज्ञान भुलाना!
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