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समुझी बात कहत मधुकर के, समाचार सव पाए इक अति चतुर हुते पहिलै हीं, अब गुरु ग्रंथ पढाए। बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी, जोग सँदेस पठाए ।