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किसवी, किसान कुल, वनिक, भिखारी, भाट, - चाकर, चपल नट, चोट, चाट, चेटकी। पेट को पढ़त, गुन गढ़त, चढ़त गिटि, अटत गहन-गन अहन अखेटकी ॥ ऊँचे-नीचे करम, धरम-अधरम कटि, पेट ही को पचत, वेचत वेटा वेटकी। 'तुलसी वुझाइ एक राम घनस्याम ही तें, आगि वड़वागितें बड़ी हे आगि पेटकी ॥
किसवी, किसान कुल, वनिक, भिखारी, भाट, - चाकर, चपल नट, चोट, चाट, चेटकी। पेट को पढ़त, गुन गढ़त, चढ़त गिटि, अटत गहन-गन अहन अखेटकी ॥ ऊँचे-नीचे करम, धरम-अधरम कटि, पेट ही को पचत, वेचत वेटा वेटकी। 'तुलसी वुझाइ एक राम घनस्याम ही तें, आगि वड़वागितें बड़ी हे आगि पेटकी ॥
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