वह पुलकनि वह उठ मिलनि, वह आदर की बात यह पठवनि गोपाल की. कछू ना जानी जात घर घर कर ओड़त फिरे, तनक दही के काज कहा भयो जो अब भयौ, हरि को राज समाज ॥ हां कब इत आवत हुती, वाही पठ्यो ठेलि । कहिहो धनि सौ जाइके, अब धन धरौ सकेलि ॥ on May 02, 2022 वह आदर की बात यह पठवनि गोपाल वह पुलकनि वह उठ मिलनि +